कबतिरेज़िक्रसेदिलशादनहीं
कबमिरेलबपेतिरीयादनहीं
पूछिएमुझसेनहाल-ए-माज़ी
क्यासुनाऊँमुझेकुछयादनहीं
वोनिगाहोंकातसादुमसर-ए-राह
मुझकोहैयादतुझेयादनहीं
इश्क़औरहुस्नहदोंमेंअपने
दोनोंपाबंदहैंआज़ादनहीं
जिससेज़ाहिरनहोंजज़्बात-ए-दिल
शे'रवोमुस्तहिक़-ए-दादनहीं
इस्तक़ामतनहींजिसकोहासिल
वोतोधोकाहैतिरीयादनहीं
गुलशन-ए-इल्म-ओ-अदबमें'अकमल'
हज़रत-ए-‘क़द्र’साउस्तादनहीं