shab-e-hayaat men qindeel-e-aarzoo tira gham | शब-ए-हयात में क़िंदील-ए-आरज़ू तिरा ग़म

  - Ali Minai
शब-ए-हयातमेंक़िंदील-ए-आरज़ूतिराग़म
सुकूत-ए-जाँमेंफ़रोज़ाँसदा-ए-हूतिराग़म
रम-ए-नफ़समेंमचलतीहुईसदातिरानाम
रग-ए-गुलूमेंसुलगताहुआलहूतिराग़म
हरीम-ए-ज़ातमेंरौशनचराग़केमानिंद
रियाज़-ए-शौक़मेंनख़्ल-ए-सुबुक-नुमूतिराग़म
मिरेशुऊ'रकेज़िंदाँमेंइकदरीचा-ए-नूर
मरेवजूदकेसहरामेंआब-जूतिराग़म
लगनकोईभीहोउन्वान-ए-जुस्तुजूतिराहुस्न
सुख़नकिसीसेहोमौज़ू-ए-गुफ़्तुगूतिराग़म
सुरूर-ओ-कैफ़कीसबमहफ़िलोंमेंदेखलिया
कहींशराबतिराग़मकहींसुबूतिराग़म
ख़याल-ओ-फ़िक्रकेसबमकतबोंमेंपूछलिया
मताअ'-ए-दानिश-ओ-तहक़ीक़-ओ-जुस्तजूतिराग़म
समा-ओ-सोज़कीसबमजलिसोंमेंढूँडलिया
मआल-ए-ज़िक्र-ओ-मुनाजात-ओ-हा-ओ-हूतिराग़म
हरममेंहिर्ज़-ए-दिल-ओ-जान-ए-क़ुदसियाँतिरानाम
सनम-कदेमेंबरहमनकीआरज़ूतिराग़म
सुकून-ए-क़ल्बजोसोचातोसर-बसरतिरीयाद
नशात-ए-ज़ीस्तकोदेखातोहू-बहूतिराग़म
ग़म-ए-जहाँग़म-ए-जानाँग़म-ए-दिगरग़म-ए-ख़्वेश
जहान-ए-ग़ममेंहरइकग़मकीआबरूतिराग़म
हरएकरंजसेगुज़रेहरइकख़ुशीसेगए
लिएफिराजिन्हेंइकउम्रकू-बकूतिराग़म
रहीकोईभीहसरतकिरखदियामैंने
हरएकजज़बा-ए-दिलकशकेरू-ब-रूतिराग़म
  - Ali Minai
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Udas Shayari

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