मेरे लिए तो इश्क़ का वा'दा है शा'इरी

आधा सुरूर तुम हो तो आधा है शा'इरी

रुद्राक्ष हाथ में है तो सीने में ओम है
कृष्णा है मेरा दिल मेरी राधा है शा'इरी

अपना तो मेल जोल ही बस आशिकों से है
दरवेश का बस एक लबादा है शा'इरी

हो आश्ना कोई तो दिखाती है अपना रंग
बे रम्ज़ियों के वास्ते सादा है शा'इरी

तुम सामने हो और मेरी दस्तरस में हो
इस वक़्त मेरे दिल का इरादा है शा'इरी

भगवान हो ख़ुदा हो मुहब्बत हो या बदन
जिस सम्त भी चलो यही जादा है शा'इरी

इस लिए भी इश्क़ ही लिखता हूँ मैं अली
मेरा किसी से आख़री वा'दा है शा'इरी

— Ali Zaryoun

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