उम्मीद तलब हसरत अरमान निकल जाएँ

अल्लाह करे दिल से ये शैतान निकल जाएँ

दुनिया की तिजारत में है आज मुनाफे बहुत
ऐसा न हो आख़िर में नुक़सान निकल जाएँ

इस दौरे जहालत में जंगल में बसाके घर
कोशिश में लगे है सब इंसान निकल जाए

तू खोल दे फिर हम पर दीवार-ओ-दर-ए-रहमत
घर बैठे हुए या रब न रमज़ान निकल जाएँ

— Ali Mohammed Shaikh

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