हाथ से गिरकर सड़क पर टॉफियाँ रोने लगीं
अतिक्रमण की बात सुनकर झुग्गियाँ रोने लगीं
ख़्वाब की उखड़ी सड़क पर अपने बचपन से मिला
देखकर सिकुड़न बदन की रोटियाँ रोने लगीं
मौसम-ए-बरसात ने आवाज़ दी जब जोर से
घर के छप्पर पर टंगी कुछ छतरियाँ रोने लगीं
जैसे तैसे नौकरी मिलने ही वाली थी मगर
पर्स ख़ाली देखकर सब डिग्रियाँ रोने लगीं
जाने वाले जा चुके थे मरने वाले मर चुके
बा'द में जब भीड़ आई पटरियाँ रोने लगीं
हम बचा नइँ पाए तुमको माफ़ कर देना हमें
क़ब्र पर जाकर हमारी जातियाँ रोने लगीं
सूखता ही जा रहा है ज़िन्दगी की धूप में
फूल का मुँह देखकर के तितलियाँ रोने लगीं
कण्व की दुहिता ने जब बढ़ते विदा को पग रखे
शाख हर रोने लगी सँग पत्तियाँ रोने लगीं
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