तेरी तस्वीर गर नहीं होती

मेरी आँखें तरस गईं होती

दिल-ए-नादाँ तू गर नहीं होता
ग़म न होता ख़ुशी नहीं होती

गर हमें सब्र-ओ-ज़ब्त आ जाता
अपनी जन्नत यही ज़मीं होती

बात हम लोग ही बढ़ाते हैं
बात इतनी बड़ी नहीं होती

अगर इस दिल की मान लेते हम
तुम कहीं होते मैं कहीं होती

कुछ तो अपना भी हाथ होता है
बात बस बख़्त की नहीं होती

हम ने इस डर से हाथ काट लिए
साँप होते गर आस्तीं होती

इस पहेली के और भी हल हैं
एक हल मौत ही नहीं होती

हाए कितनी हसीन सूरत है
हाए सीरत भी कुछ हसीं होती

हम ने दिन रात एक कर दिए हैं
ख़्वाब सी ज़िंदगी नहीं होती

— Anjali Sahar

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Qismat Shayari

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