जब तलक भी रहे रवानी में
हम ने रस्ते बनाए पानी में
बूढ़ी आँखों में ख़ौफ़ पसरा है
क्या खताऐं हुई जवानी में
मेरा किरदार मर नहीं सकता
क़ेस हूँ इश्क़ की कहानी में
तुम ने फूलों में नफ़रतें भर दीं
चंद लम्हों की बाग़बानी में
ये मिरा ख़्वाब सच न हो जाए
शो'ले देखे भड़कते पानी में
— Asif Kaifi














