"ख़्वाबों की तन्हाई"

क्या तुम्हें नींद आती है?
क्या तुम्हें ख़्वाब आते है?
क्या तुम रातों को सो जाती हो?
मैं?
नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता
मेरी तो नींद तुम्हारी है ना
मेरे तो ख़्वाब भी तुम्हारे है
ख़ैर अब इन ख़्वाबों में एक तन्हाई है
तन्हाई?
हम्म्म,
अच्छा तन्हाई क्या है?
तुम नहीं जानती?
हाँ, तुम तो ख़्वाब देखने वाली हो ना
तुम ने मेरे कमरा भी तो नहीं देखा
ये बिस्तर
ये दीवारें
किताबें
अधूरी जली सिगरेट
चाय के छींटों से भरे कप
ये बेवजह शोर करता हुआ फेन
ये टिक टिक टिक टिक टिक टिक टिक टिक टिक टिक टिक टिक, टिक टिक टिक टिक !
ये टिक टिक करती घड़ी जो मौत के आने की ख़बर देती है
ये बिस्तर के चारों तरफ़ फैला सन्नाटा
ये खिंडकियों से झाँकता धूप का ख़ाली-पन
ये मोबाइल जो आधे वक़्त अब बंद ही रहता है
तेरे बा'द किसी से बात नहीं की मैं ने
अब कोई मुझे भी कॉल नहीं करता
ये मोबाइल लाश के जैसे बिस्तर पर पड़ा है
किसी रोज़ इस का भी जनाज़ा उठायेंगे
ख़ैर छोड़ो ये सब
ये क्यूँ किसी की आँखों में ख़्वाब नहीं है
क्यूँ किसी के ख़्वाबों में बस आँखें है
अरे तुम भी ना!
छोड़ो ये सब
मैं तुम्हें क्या बता रहा था वैसे?
हाँ तन्हाई!
तन्हाई सुकून से बनी वो बेतरतीब शह है
जो कुन की यकताई का मौजज़ा है
ख़्वाबों का सन्नाटा सुना है?
उस सन्नाटे को समेट कर एक पेकर में डालो तब जा कर तन्हाई बनती है,
चाय से भरे ठंडे कप देखे है?
हाँ, वो ठंड तन्हाई है,
तुम ने सुना है परिंदों की चह-चहाहट?
उन के परों का फड़-फड़ाना?
क्या तुम ने बादल आते देखें हैं?
क्या तुम ने देखा है केसे कोई बूँद अपने जिस्म की रूह को छोड़ कर ज़मीं की तरफ़ दौड़ी चली आती है?
क्या तुम ने देखा है केसे वो बूँद ज़मीं पर गिर कर उसी की हो कर रह जाती है,
तुम ख़्वाब देखती हो ना?
चलो तो फिर बताओ क्या क्या देखती हों?
क्या देखा है तुम ने किसी रूह से उस के दिल का निकल जाना?
क्या देखा है तुम ने रक़्स करता हुआ हिज्र?
क्या देखा है तुम ने क़ैस को समुंदर पर चलते?
क्या देखा है तुम ने कुन के बा'द किसी का न बनना?
क्या देखा है तुम ने उन हक़ीक़तों को जो हक़ीक़त से दूर है?
क्या देखा है तुम ने टूटी पत्तियों का फिर से शाखों पर चले जाना?
क्या देखा है तुम ने आँसुओं से आँखों का बहना?
क्या देखा है तुम ने उन गुलदस्तों को जो माज़ी को समेट कर बनाए गए?
क्या देखा है तुम ने तारों को आसमाँ से ख़ाली होते?
क्या देखा है तुम ने केसे हँसते हँसते कोई दर्द छुपाता है?
क्या देखा है तुम ने फूलों को किताबों में लाल होते?
क्या देखा है तुम ने लाल लहू का सफ़ेद होना?
क्या देखा है तुम ने सड़क पर दुपट्टा लेते हुए डर को चलते?
क्या देखा है तुम ने एक जिस्म का दूसरे जिस्म का शिकार होते?
क्या देखा है तुम ने सड़क किनारे उस तीन फीट की ज़िंदा मूर्ति को जिस की आँखें बंद कर दी गई हैं?
क्या देखा है तुम ने उन के हाथ काट दिए गए हैं और पैर न जाने किस नाले में बह रहे हैं?
क्या देखा है तुम ने एक पत्थर का ख़ुदा हो जाना?
क्या देखा है तुम ने एक ख़ुदा का पत्थर हो जाना?
क्या देखा है तुम ने सड़क किनारे झपकते लाइट के नीचे देश का मुकद्दर पलते?
क्या देखा है तुम ने पाँच सितारा होटल में भारी प्लेट छोड़ आना?
क्या देखा है तुम ने सड़क पर एक रोटी पर दो ख़ून का बहना?
क्या देखा है तुम ने सियासत को मज़हब से हटा कर?
क्या देखा है तुम ने मोहब्बत को सियासत से हटा कर?
क्या देखा है तुम ने लगे हुए पोधो का सुख जाना?
क्या देखा है तुम ने मौत ज़िंदगी से ज़्यादा ख़ूब-सूरत है?
क्या क्या क्या?
ये सब नहीं देखा!
मतलब तुम ख़्वाब नहीं देखती
तुम्हें नहीं पता ख़्वाबों का दर्द कैसा है
ये तपती रेत पर नंगे पाँव चलने का दर्द
ये बारिशों में एक जगह खड़े रहने का दर्द
ये धूप में जलते शजर, ये शजर से लिपटी परिंदों की लाश
ये समुंदर किनारे प्यास से मर जाने का दुख
ये समुंदर की हिफाज़त करते किनारे, ये किनारों पर तैनात दरख़्त
ओर फिर उन के सर चढ़ कर नाचती धूप
अगर ये सब नहीं देखती तो पिक्चर देखती हो तुम
सच मानो ख़्वाब नहीं देखती हो तुम
अरे रुको रुको
हाँ यहीं, बस यहीं!
रुको रुको रुको
बस यहीं रुको और देखो वो दूर से आता ज़िंदगी का ग़म
वो ग़म अब तुम्हें भी सोने नहीं देगा
ख़ैर!
मैं तुम से कुछ पूछ रहा था?
हाँ, मैं ये पूछ रहा था के
क्या तुम्हें नींद आती है
क्या तुम्हें ख़्वाब आते है
क्या तुम रातों को सो जाती हो
मैं?
नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता
मैं ने बताया ना!
मेरी तो नींद तुम्हारी है
मेरे ख़्वाब भी तुम्हारे है
ख़ैर अब इन ख़्वाबों में एक तन्हाई है
तन्हाई, तन्हाई, तन्हाई
तन्हाई?
हम्म
ख़ैर
छोड़ो ये सब
और बताओ कैसी हो तुम?

— Aves Sayyad

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