तेरी आँखों ने दीवाना कर रक्खा है
मंदिर जैसा दिल मयख़ाना कर रक्खा है
तेरा हुस्न शराब हुआ है जब से हमदम
मैं ने आँखों को पैमाना कर रक्खा है
वैसे तो बिल्कुल सादा मौसम था लेकिन
तेरी ज़ुल्फ़ों ने मस्ताना कर रक्खा है
अब तुम भी आ जाओ तो आबाद न होगा
इस दर्ज़ा दिल को वीराना कर रक्खा है
तेरी आमद पे तुझ को मैं पेश करूँगा
मैं ने अश्कों को नज़राना कर रक्खा है
— Avtar Singh Jasser















