ख़ुदा करे मिरी दुआ से तुझको अब शिफ़ा मिले
किसी तरह मुझे मिरे अमल की अब जज़ा मिले
मिरा ये दिल महक उठे अगर मुझे तू आ मिले
महक तो क्या मुझे तो तीरगी में भी ज़िया मिले
अगर है तुझ
में चाह और पाक-दामनी तो फिर
तिरे लिए जहाँ-ए-ख़ुल्द क्यूँ तुझे बुरा मिले
तिरे तो आसपास हैं बहुत हसीन चेहरे भी
ख़ुदास फिर गिला ही क्या कि तुझको कुछ नया मिले
है आरज़ू अगर मिले मक़ाम-ए-दिल में सब 'बशर'
बना तू ख़ुद को नेक ताकि तुझको भी दुआ मिले
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