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वो जो ग़ज़लों के उस्ताद हैं दोस्तों  - Dr. Urmilesh

वो जो ग़ज़लों के उस्ताद हैं दोस्तों
क्या कहें कितने जल्लाद हैं दोस्तों

ज़िंदगी की ज़बाँ उन को आती नहीं
वो किताबों की ईजाद है दोस्तों

एक भी शे'र ग़ालिब का समझे नहीं
वैसे ग़ालिब की औलाद हैं दोस्तों

बुलबुलों सी वो ग़ज़लें सँवारेंगे क्या
वो तख़ल्लुस से सय्याद हैं दोस्तों

क्या अजब शख़्स हैं कुछ भी समझे बिना
दे रहे दाद पर दाद हैं दोस्तों

उन के शागिर्द जो भी हैं बर्बाद हैं
और वो हैं कि आबाद हैं दोस्तों

अब भी साक़ी सुराही में उलझे हैं वो
गुज़रे वक़्तों की इक याद हैं दोस्तों

Dr. Urmilesh
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