कुछ अधूरे से हैं क़िस्से इक अधूरी सी कहानी
सुन सको तो ग़ौर से सुनलो हवाओं की ज़बानी
इक मुकम्मल सी सहर है इक अधूरी दोपहर भी
शब नई सी है कहीं तो शाम कोई है पुरानी
वस्ल की देता गवाही जाग शब भर चाँद देखो
चाँदनी की शान में कहता ग़ज़ल कोई रुमानी
श्याम सी बंसी बजाता गुनगुनाता सा मधुप है
प्रेम में उस के पड़ी है राधिका सी रातरानी
हिज्र में रोता किसी के इक समुंदर फिर रहा है
ध्यान से सुन कह रही क्या रेणु लहरों की रवानी
— Renuka Vyas















