हुआ न हम सेे जब जब्त तो चले आए
कहे गए जब कमबख्त तो चले आए
मोम सा बदन था उस दिलकशी का
दिल था पर बहुत सख्त तो चले आए
परिंदों का मन लगा था बयाबान में
सूखे जो सभी दरख़्त तो चले आए
बुरे हालात में हम ने साथ दिया उन का
आया जो अच्छा वक़्त तो चले आए
ऐसा न था कि जंग थी मुहब्बत पर,
खाई हम ने जब शिकस्त तो चले आए
— Om Shukla















