us ki gali men zarf se badh kar mila mujhe | उस की गली में ज़र्फ़ से बढ़ कर मिला मुझे

  - Fawad Ahmad
उसकीगलीमेंज़र्फ़सेबढ़करमिलामुझे
इकप्यालाजुस्तुजूथीसमुंदरमिलामुझे
मैंचलपड़ाथाऔरकिसीशाहराहपर
ख़ंजर-ब-दस्तयादोंकालश्करमिलामुझे
दरिया-ए-शबसेपारउतरनामुहालथा
टूटाहुआसफ़ीना-ए-ख़ावरमिलामुझे
तारोंमेंउसकाअक्सहैफूलोंमेंउसकारंग
मैंजिसतरफ़गयामिरादिलबरमिलामुझे
हरज़र्राबा-कमालहैहरपत्ताबे-मिसाल
दुनियामेंख़ुदसेकोईकम-तरमिलामुझे
कबसेभटकरहाहूँमैंइसदश्तमेंमगर
ख़ुदसेकभीमिलातिरादरमिलामुझे
होतानहींहैतुझपेकिसीबातकाअसर
लगताहैतेरेरूपमेंपत्थरमिलामुझे
बे-कैफ़कटरहीथीमुसलसलयेज़िंदगी
फिरख़्वाबमेंवोख़्वाबसापैकरमिलामुझे
इसबातपरकरूँँगामैंदिनरातएहतिजाज
किसजुर्ममेंयेख़ाककाबिस्तरमिलामुझे
मुझकोनहींरहीकभीमंज़रकीजुस्तुजू
घरकेक़रीबकू-ए-सितमगरमिलामुझे
जबतकरहामैंख़ुदमेंभटकतारहायहाँ
जबख़ुदकोखोदियातोतिरादरमिलामुझे
मिट्टीमेंढूँडताहुआकुछबूढ़ाआसमाँ
मैंजिसतरफ़गयायहीमंज़रमिलामुझे
करतेहैंलोगहुस्नसेयाँना-रवासुलूक
रोतेहुएहमेशागुल-ए-तरमिलामुझे
  - Fawad Ahmad
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Gaon Shayari

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