Diwali Shayari
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Diwali Shayari

मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं — Unknown
था इंतिज़ार मनाएँगे मिल के दीवाली न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ — Aanis Moin
राहों में जान घर में चराग़ों से शान है दीपावली से आज ज़मीन आसमान है — Obaid Azam Azmi
हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर इक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का — Nazeer Akbarabadi
जलते हैं इक चराग़ की लौ से कई चराग़ दुनिया तिरे ख़याल से रौशन हुई तो है — Shahzad Ahmad
जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं — Jamuna Parsad Rahi
शाम से छत पर घुम रहा हूँ एक दिए के आगे-पीछे — Shariq Kaifi
आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ — Azm Shakri
जो बुजुर्गों की दु'आओं के दीयों से रौशन रोज़ उस घर में दीवाली का जश्न होता है — Pratap Somvanshi
वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से — Kaif Bhopali
मैं चाहता हूँ इक मुसलमां दोस्त हो मेरा मेरे मकाँ में ईद हो उस के दिवाली हो — Siddharth Saaz

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