चश्म-ए-तमन्ना
जिसेनींदआईथीसदियोंकीबीमारियोंकीथकनसे
जागउट्ठीहैशायद
बदनमेंनयादिनशगूफ़ेकीमानिंदउभरा
शफ़क़-ज़ारबनकर
दिलकीआग़ोशमेंआबसाहै
नज़ारेमेंमसहूररहनेकीख़्वाहिशजनमलेरहीहै
बसाकरउसेअपनीनज़रोंमें
शादाबआँखोंमेंरहनेकोजीचाहताहै
वहीरंग-ओ-बूकीहरारतकीहल्कीलकीरें
तमाज़तकेझोंकेबदनछूरहेहैं
बहारआगईयादकीवादियोंमें
सफ़रकेइरादोंसेमायूसकश्ती
किनारेपेयूँँआलगीहै
किठहरीहुईझीलकीरौशनीमेंनयाघरबसाहै
येचश्म-ए-तमन्नाकीकश्तीबनीहैनयाआशियाना
नीलगूँरौशनीतैरतीहै
मगरयेखड़ीहै
ज़मानेमोहब्बतकेफिरलौटआएहैंशायद
वक़्तकेठहरजानेकीशायदघड़ीहै
क़यामतकड़ीहै