हर शख़्स को हैरत की तस्वीर बना देगा
अब क्या किसी पैकर को आईना जला देगा
रजअ'त भी करेगा तो ठहरा हुआ सय्यारा
सूरज की मोहब्बत में घर अपना जला देगा
कम-बख़्त को इतना भी एहसास नहीं शायद
जीने के लिए अपने औरों को दु'आ देगा
कुछ याद नहीं मुझ को मैं कौन हूँ कैसा हूँ
क्या कोई मुझे मेरी पहचान बता देगा
सोचो तो 'ग़यूर' उस का एहसास भी क़ातिल है
इक बार तो हँस देगा सौ ज़ख़्म लगा देगा
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