ज़िन्दगी भर तो तमाशा नहीं कर पाएँगे
कर लिया तो भी ज़ियादा नहीं कर पाएँगे
कुछ न कुछ ख़ुदस समझना ही पड़ेगा वरना
ऐसे हर बार इशारा नहीं कर पाएँगे
बात रखनी थी छुपाकर हमें दिल में उन की
इस लिए ऐसे ख़ुलासा नहीं कर पाएँगे
करते आए है सभी का यहाँ अच्छा अच्छा
पर मुसलसल तो हम अच्छा नहीं कर पाएँगे
जीने के सारे बहाने हो गए ख़त्म मेरे
अब नया कोई बहाना नहीं कर पाएँगे
मान लो नाम कभी पूछ लिया महफ़िल में
वहाँ पर ज़िक्र तुम्हारा नहीं कर पाएँगे
ख़ुद
ख़ुशी का तू नया कोई तरीका बता बस
क्योंकि हम इश्क़ दुबारा नहीं कर पाएँगे
वैसे लिख देंगे ग़ज़ल एक नई आँखों पर
पर कमाल उतना का उतना नहीं कर पाएँगे















