कोई अपनी ज़िंदगी से हार बैठाऔर कोई दिल-लगी से हार बैठाएक ही दिल था मिरे अंदर जिसे मैंउस नज़र की सादगी से हार बैठाढोल पीटे जा रहा था मैं जहाँ मेंपर तिरी इस बंदगी से हार बैठा— Murari Mandal