main raat thii siyaah raat | मैं रात थी सियाह रात

  - Janan Malik
मैंरातथीसियाहरात
एकनुक़्तेमेंसिमटीहुई
आँखकीपुतलीजैसेनुक़्तेमें
मैंनेएकदिनकोबाहरनिकाला
फिरउसदिनकीबा-ईंपस्लीसे
ख़ुदबाहरनिकली
फिरमिरेअंदरकितनेसूरजचाँदऔरसितारेअपनीअपनीमंज़िलेंतयकरनेलगे
मैंरातहूँकभीख़त्महोनेवालीरातमैंनेअपनीपोशाककारंगपैदाकियाफिररंगोंसेरंगमिलतेचलेगए
मैंरातहूँ
मेरेएकबाज़ूपरसुब्हऔरदूसरेपरशामसोरहेहैं
मेरीचादरकेनीचे
शहरक़ब्रिस्तानोंकीतरहपड़ेहुएहैं
अज़ानेंएकदूसरेसेटकराकर
गुम्बदोंकेआस-पास
गिरजातीहैं
लोगभिनभिनातीहुईमक्खियोंकीतरह
जागतेऔरसोजातेहैं
ख़ुदअपनालहूगिरातेऔरचाटतेहैं
समुंदरचीख़तेऔरदरियारेंगते
देखतीरहतीहूँ
देखतीरहतीहूँचुप-चाप
उनकाअंत
जिनसेफिरउन्हींकाजनमहोगा
अंतजोनएजन्मकाबीजहै
ग़ुरूबजोतुलूअ''केतश्तकाग़िलाफ़है
मैंरोनेऔरहँसनेसेमावराहूँ
कभीकभीमाँकीमोहब्बत
मेंरोतेहुएबच्चे
कीआवाज़मुझेचौंकादेतीहै
  - Janan Malik
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

Mohabbat Shayari

Our suggestion based on your choice

Similar Writers

our suggestion based on Janan Malik

Similar Moods

As you were reading Mohabbat Shayari Shayari