ख़ुदा मुझ को यहाँ बस एक वो दरिया बचाना है

किसी प्यासे के पानी का मुझे हिस्सा बचाना है

इरादा कर लिया है उस ने सब कुछ भूल जाने का
वो ज़िद पे है अड़ा अपनी मुझे रिश्ता बचाना है

रही थी चूम मुझ को फिर अचानक रुक के बोली वो
कि अगली बार की ख़ातिर भी कुछ बोसा बचाना है

छुपा के बैठी चेहरा अपना चिलमन में बशर्ते इस
हमें तो देखना चेहरा उसे पर्दा बचाना है

— Manas Ank

More by Manas Ank

Other ghazal from the same pen

See all from Manas Ank →

Bekhabri Shayari

Shers of bekhabri.

All Bekhabri Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling