हमारी आँख को जब भी कभी दरिया नहीं मिलता

सुकून-ए-दिल का हम को फिर कहीं रस्ता नहीं मिलता

न जाने कितने दिखते हैं हसीं चेहरे मुझे हर दिन
मुझे तो बस उसी इक शख़्स का चेहरा नहीं मिलता

कुछ ऐसे ही नतीजे रोज़ मिलते है मुहब्बत में
कभी भी इम्तिहान-ए-इश्क़ में पर्चा नहीं मिलता

कई ग़ज़लें अधूरी ही गई है रह हमारी भी
कभी मक़्ता' नहीं मिलता कभी मतला' नहीं मिलता

— Manas Ank

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Nigaah Shayari

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