बस इतना हो जाए काम हमारा
मिल जाए उस को पैग़ाम हमारा
वो चाहें तो भूल हमें सकते हैं
पर यादों में रखलें नाम हमारा
उस को दिल में रखके अपना समझा
समझो इतना था इल्ज़ाम हमारा
वो इक करवट कैसे सौ सकता है
जिस ने छीना है आराम हमारा
अब ये जीवन कटने से क्या होगा
अब ये जीवन है इतमाम हमारा
— Manish watan















