मुल्क मेरा हमनवॉ है मुल्क ही ईमान है

ऐ शहीदों आप से क़ाएम वतन की शान है

हम सुकूँ से रात में सोते बदौलत आप की
आपसे ही है तिरंगा आपसे पहचान है

कल तलक़ जिस घर में थीं रंगरेलियाँ, चाहत, ख़ुशी
आज देखो हर गली हर एक घर सुनसान है

माँग का सिन्दूर रोया रो रही हैं राखियाँ
आपसे होली दिवाली आपसे रमज़ान है

बच न पाए आज अपने हिन्द का दुश्मन कोई
जल रही 'अक्षत' के दिल में आग औ शमशान है

— Puneet Mishra Akshat

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