कुछ नहीं बदला है साहब आप के होते हुए
एक बच्चा मर गया फिर भूख से रोते हुए
मैं ने तो चाहा था बस पाया नहीं था आप को
फिर मुझे क्यूँ डर लगा था आप को खोते हुए
मुझ पे बंदिश कुछ ज़ियादा ही रही थी दोस्तों
इश्क़ भी करना था ज़िम्मेदारियाँ ढोते हुए
— Neeraj jha
एक बच्चा मर गया फिर भूख से रोते हुए
मैं ने तो चाहा था बस पाया नहीं था आप को
फिर मुझे क्यूँ डर लगा था आप को खोते हुए
मुझ पे बंदिश कुछ ज़ियादा ही रही थी दोस्तों
इश्क़ भी करना था ज़िम्मेदारियाँ ढोते हुए
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