वो अगर प्यारे हैं प्यारे लगने दो

हाथ नज़रों के ख़ज़ाने लगने दो

हुस्न छलकेगा हसीनों का यहाँ
इस समुन्दर को किनारे लगने दो

अक़्ल से मेहरूम ये रह जाएँगे
सब को ठोकर आते जाते लगने दो

छोड़ूँगा न नौकरी ये इश्क़ की
अबकी बारी जैसे तैसे लगने दो

शर्तें क्या ये सौदा है दिल का कमाल
वो न भी हो पर हमारे लगने दो

— Abuzar kamaal

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Mazdoor Shayari

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