doori men kyun ki ho na tamannaa huzoor ki | दूरी में क्यूँँ कि हो न तमन्ना हुज़ूर की

  - Qalaq Merathi
दूरीमेंक्यूँँकिहोतमन्नाहुज़ूरकी
मंज़िलकोमेरीक़ुर्बसेनिस्बतहैदूरकी
फ़ुर्क़तनेउसकीवस्लकीतशवीशदूरकी
तस्कींनहींहैयूँँभीदिल-ए-ना-सुबूरकी
मूसाकेसरपेपाँवहैअहल-ए-निगाहका
उसकीगलीमेंख़ाकउड़ीकोह-ए-तूरकी
कहताहैअंजुमनकोतिरीख़ुल्दमुद्दई
इसबुल-हवसकेदिलमेंतमन्नाहैहूरकी
वाइज़नेमय-कदेकोजोदेखातोजलगया
फैलागयाचराँदशराब-ए-तहूरकी
मूसाकोक्यूँँमौज-ए-तजल्लीधकेलदे
जल्वेसेउसकेगुलहुईमशअ'लशुऊ'रकी
अरबाब-ए-वक़्तजानतेहैंरोज़गारने
कीसहवसेवफ़ातोतलाफ़ीज़रूरकी
रुस्वाइयोंकाहौसलाघटघटकेबढ़गया
सामाँहैख़ामुशीमिरीशोर-ए-नुशूरकी
मेलआसमाँकासू-ए-ज़मींबे-सबबनहीं
ज़ेर-ए-क़दमजगहहैसर-ए-पुर-ग़ुरूरकी
उससेमिलिएजिससेमिलेदिलतमामउम्र
सूझीहमेंभीहिज्रमेंआख़िरकोदूरकी
पामालकररहाहैसियह-रोज़ियोंकाजोश
मिट्टीख़राबहैमिरेकलबेमेंनूरकी
क्याएकक़ुर्ब-ए-ग़ैरकासदमापूछिए
हैंदिलकेआसपासबलादूरदूरकी
मज़मूँमिरेउड़ाए'क़लक़'सबनेइसक़दर
सुनताहूँमैंतरानाज़बानीतुयूरकी
  - Qalaq Merathi
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