हम ने ये कब कहा है तुम दिलरुबा हो जाओ

पहले क़रीब आओ फिर बे-वफ़ा हो जाओ

हम को तो मिल गई है फिर से नई मुहब्बत
तुम भी किसी की उल्फ़त में मुब्तिला हो जाओ

तुम ने गुलाब माँगा उस ने शराब दी है
उस का इशारा समझो उस से जुदा हो जाओ

रखना अगर नहीं है रिश्ता किसी से तुम को
छोटी सी बात पर तुम सब से ख़फ़ा हो जाओ

पापों से भर गया हैं अब तो घड़ा तुम्हारा
गंगा नहाओ जा कर फिर से ख़ुदा हो जाओ

अरमाँ जगा के दिल के फिर से सुला दिए है
ख़ुद ही जलाओ दीपक ख़ुद ही हवा हो जाओ

— Rachit Sonkar

More by Rachit Sonkar

Other ghazal from the same pen

See all from Rachit Sonkar →

Maikada Shayari

Shers of maikada.

All Maikada Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling