मुझ को उल्फ़त में चिंगारी देखनी है
साफ बताता हूँ दीवाली देखनी है
जाना है ख़ुश हो कर उस की शादी में
आज हमें अपनी बर्बादी देखनी है
इश्क़ का खेल दुबारा खेलो मेरे साथ
मुझ को दिल की हारी बाज़ी देखनी है
इश्क़ के पिंजरे से उस को आज़ाद करो
क़ैदी को भी अब आज़ादी देखनी है
आँधी में गिरता है जैसे पेड़ कोई
वैसी हालत मुझ को तुम्हारी देखनी है
— Rachit Sonkar















