मुझको उल्फ़त में चिंगारी देखनी है
साफ बताता हूँ दीवाली देखनी है
जाना है ख़ुश हो कर उसकी शादी में
आज हमें अपनी बर्बादी देखनी है
इश्क़ का खेल दुबारा खेलो मेरे साथ
मुझको दिल की हारी बाज़ी देखनी है
इश्क़ के पिंजरे से उसको आज़ाद करो
क़ैदी को भी अब आज़ादी देखनी है
आँधी में गिरता है जैसे पेड़ कोई
वैसी हालत मुझको तुम्हारी देखनी है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Rachit Sonkar
our suggestion based on Rachit Sonkar
As you were reading Ishq Shayari Shayari