jaam haathon mein tha par piya hi nahin | जाम हाथों में था पर पिया ही नहीं

  - Rachit Sonkar

जाम हाथों में था पर पिया ही नहीं
इक बदन जिसको हमने छुआ ही नहीं

देख कर मैं जिसे होश खोने लगूँ
फूल ऐसा अभी तक खिला ही नहीं

याद मेरी उधर उसको आने लगी
और मुझको इधर कुछ हुआ ही नहीं

इश्क़ हमने किया इश्क़ तुमने किया
वो अलग बात है दिल लगा ही नहीं

देख सकते थे आँखों से सब कुछ मगर
हिज्र के वक्त कुछ भी दिखा ही नहीं

उसने जो कुछ भी माँगा उसे मिल गया
हमने जो कुछ भी माँगा मिला ही नहीं

जो मिले हैं हमें इश्क़ की चोट से
ऐसे ज़ख़्मों की कोई दवा ही नहीं

उसने पूछा कि क्यों रो रहे हो 'रचित'
मुस्कुरा कर कहा कुछ पता ही नहीं

  - Rachit Sonkar

Hijr Shayari

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