मैं उसे बेकसी में जुदा कर गया
ये बहाना बता कर के मन भर गया
सब यहाँ दिल की आदत से मजबूर हैं
तुझ को भी तो नहीं जाना था पर गया
मेरे अंदर फ़क़त अब तमाशाई है
वो जो गुम-सुम था इक आदमी मर गया
हम भी उस दिल के रस्ते पे सुनते तो हैं
हम से पहले कोई एक लश्कर गया
सुब्ह निकला था वो आसमाँ की तरफ़
दिन में उड़ता रहा शाम को घर गया
इश्क़ और हश्र तो बा'द की बात है
तू तो 'रजनीश' बस नाम से डर गया
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















