ख़रीदारों की तैयारी बहुत है
अभी मुझ
में तो ख़ुद्दारी बहुत है
नहीं मतलब जिन्हें दीन-ओ-यक़ीं से
ज़बाँ पे उन की दीं-दारी बहुत है
जहाँ जाता क़यामत है वो ढाता
निगाहों में अदाकारी बहुत है
जला के ख़ाक कर देगा वतन को
के अख़बारों में चिंगारी बहुत है
सँभल कर तुम चलो राह ए वफ़ा में
वफ़ा थोड़ी है अय्यारी बहुत है
फिज़ाओं में यहाँ नफ़रत है छाई
अमन को एक फुलवारी बहुत है
ज़रा सा देख के बोलो 'मलक' तुम
लगाए कान दरबारी बहुत है
— Ram Singar Malak















