हवा भी आज क़ातिल हो गई है
तेरी ख़ुशबू जो शामिल हो गई है
गुल-ए-रुख़्सार ऐसा है तुम्हारा
हर इक तितली भी माइल हो गई है
सुना जब से तेरे आने का सब ने
बड़ी रंगीन महफ़िल हो गई है
तेरी तस्वीर आँसू ख़्वाब रख कर
पलक हर एक बोझिल हो गई है
जहाँ भर के लबों पे तेरा चर्चा
ये दुनिया तेरी काइल हो गई है
नहीं है कुछ तेरी गलियों से आगे
तिरा दर मेरी मंज़िल हो गई है
तुझे देखा तो गुल शर्मा गए हैं
मुहब्बत के तू क़ाबिल हो गई है
'मलक' कुछ दिन बिछड़ के देखते हैं
वफ़ा की राह मुश्किल हो गई है
— Ram Singar Malak















