माँ की बस इक दुआ है अता मुफ़्त में
बाक़ी हासिल न कुछ भी हुआ मुफ़्त में
तुम को क़ीमत चुकानी है हर चीज़ की
कब मिली है यहाँ पे हवा मुफ़्त में
हर घड़ी शुक्र रब का अदा कीजिए
वो ही करता है हर हक़ अदा मुफ़्त में
तुम को बदले में दिल के मिला दिल मेरा
इश्क़ में मैं तो मारा गया मुफ़्त में
साँस देनी पड़ी धड़कनें रोक कर
कब मिली है किसी को कज़ा मुफ़्त में
मैं किसी की ज़रूरत नहीं अब रहा
याद कोई करे क्यूँ भला मुफ़्त है
मुफ़्त में हम ने चाहा था उस को "मलक"
और फिर हम ने पाई सज़ा मुफ़्त में
— Ram Singar Malak















