पहन हिजाब कहूँ क्या हिजाब में लागेहिसाब आग लगे फिर किताब में लागेबदल गई है तिरी चाल क्या हुआ था शबपिघल गया था लगे शे'र ख़्वाब में लागे— Raushan miyaa'n