नींद मुझ को जो आ रही है शजर
वो कहीं गुनगुना रही है शजर
मैं न कहता था इश्क़ मत करियो
अब वो परदेस जा रही है शजर
मैं कि ख़ुद का नहीं हूँ वो लड़की
मुझ को अपना बता रही है शजर
ताकि शब के दिवाने जाग सकें
शब सितारे जला रही है शजर
मुझ को ग़ुस्सा उतारना है पर
वो अभी मुस्कुरा रही है शजर
— Sanjay shajar















