उस ने मुझ को न जाने क्या समझा
जिस को मैं ने सदा ख़ुदा समझा
शे'र सुन कर के डिग्रियाँ पूछी
उस ने मुझ को पढ़ा लिखा समझा
आप समझेंगे तब बहुत मुझ को
आपने गर मुझे ज़रा समझा
यूँ हीं ग़ज़लें नहीं कही उस पर
उस को सालों पढ़ा सुना समझा
कर दिया हल किसी सियाने ने
मैं ने जब तक वो मसअला समझा
उस ने ही बेवफ़ाई समझाई
जिस को मैं ने था बा-वफ़ा समझा
— Sanjay shajar















