यहाँ कुछ रहा हो तो हम मुँह दिखाएं
उन्होंने बुलाया है क्या ले के जाएँ
कुछ आपस में जैसे बदल-सी गई हों
हमारी दुआएँ तुम्हारी बलाएं
तुम एक खाब थे जिस
में ख़ुद खो गए हम
तुम्हें याद आएँ तो क्या याद आएँ
वो एक बात जो ज़िन्दगी बन गई है
जो तुम भूल जाओ तो हम भूल जाएँ
वो खामोशियां जिन
में तुम हो न हम हैं
मगर हैं हमारी तुम्हारी सदाएं
बहुत नाम हैं एक 'शम
शे'र' भी है
किसे पूछते हो, किसे हम बताएं
— Shamser Bahadur Singh















