न लेंगे दर्द ना ही हम दवा लेंगे
तिरे हाथों ख़सारा सो नवा लेंगे
नहीं था दूसरा कोई तिरे जैसा
बनाएँगे नकल फिर नारवा लेंगे
ये दिल टूटा कई सौ बार तुम ही से
मिले गर ज़ख़्म पर दम वो हवा लेंगे
सदाएँ जो हमारी बस दुआ में थीं
तलब थी बद-दुआ की ख़ुशनवा लेंगे
कई लाशें मिली तुम जब गए तब से
सभी ये कह रहे वो घर नवा लेंगे
— Shiv















