दिलकेसहरामेंबड़ेज़ोरकाबादलबरसा
इतनीशिद्दतसेकोईरातमुझेयादआया
जिससेइकउम्ररहादा'वा-ए-क़ुर्बतमुझको
हाएउसनेनकभीआँखउठाकरदेखा
तोमिरीमंज़िल-ए-मक़्सूदहैलेकिननापैद
मैंतिरीधुनमेंशब-ओ-रोज़भटकनेवाला
फैलजातातिरेहोंटोंपेतबस्सुमकीतरह
काशहालातकापहलूकभीहोऐसा
कितनीशिद्दतसेतिरेआरिज़-ओ-लबयादआए
जबसर-ए-शामउफ़ुक़परकोईताराचमका
अबकेइसतौरसेआईथीगुलिस्ताँमेंबहार
दामन-ए-शाख़मेंसूखाहुआपत्ताभीनथा
दास्ताँग़मकीउसे'ताब'सुनातेक्यूँँहो
कबरग-ए-संगसेख़ूँकाकभीधारानिकला