हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गएहिज्र से बचने के मंतर आ गएमैं ने तुम को अंदर आने का कहातुम तो मेरे दिल के अंदर आ गएएक ही औरत को दुनिया मान करइतना घूमा हूँ कि चक्कर आ गएइम्तिहान-ए-इश्क़ मुश्किल था मगरनक्ल कर के अच्छे नंबर आ गएतेरे कुछ आशिक़ तो गंगाराम हैंऔर जो बाक़ी थे निश्तर आ गए— Tehzeeb Hafi