लोग ज़बानी याद भी हो जाते हैं

दिल लेकिन बर्बाद भी हो जाते हैं

इन मुश्किल हालात से लड़ते लड़ते
बच्चे ये फ़ौलाद भी हो जाते हैं

सुनते आए थे जो इश्क़ से पहले
वो क़िस्से रूदाद भी हो जाते हैं

जिन को तुम हाकिम कहते फिरते हो
लोग वही शद्दाद भी हो जाते हैं

बिन माँगे भी मिल जाते हैं लेकिन
लोग यही फ़रियाद भी हो जाते हैं

ये मालूम नहीं है शायद तुम को
इश्क़ में दिल नाशाद भी हो जाते हैं

कहना है 'सलमा' को बस इतना ही
शिकार ख़ुद सय्याद भी हो जाते हैं

— Salma Malik

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Yaad Shayari

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