क्या अजब याद उस की आती है
सिर्फ़ अब याद उस की आती है
वो जो गाने कभी मैं सुनता था
उन से अब याद उस की आती है
कोई कहता है क्या मैं सो जाऊँ
मुझ को तब याद उस की आती है
गिन के होतीं तो भूल भी जाता
याद सब याद उस की आती है
भूल जाता हूँ ख़ुद को ही मैं तो
मुझ को जब याद उस की आती है
इक गुलाबी सी शाम और सर्दी
ऐसी छब याद उस की आती है
इक घड़ी एक पल का क्या कहना
बे सबब याद उस की आती है
मेरी आवाज़ सुन के खो जाना
वो तलब याद उस की आती है
— Toyesh prakash















