वो मुँह लगाता है जब कोई काम होता है
जो उसका होता है समझो ग़ुलाम होता है
किसी का हो के दुबारा न आना मेरी तरफ़
मोहब्बतों में हलाला हराम होता है
इसे भी गिनते हैं हम लोग अहल-ए-ख़ाना में
हमारे याँ तो शजर का भी नाम होता है
तुझ ऐसे शख़्स के होते हैं ख़ास दोस्त बहुत
तुझ ऐसा शख़्स बहुत जल्द आम होता है
कभी लगी है तुम्हें कोई शाम आख़िरी शाम
हमारे साथ ये हर एक शाम होता है
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