तो कैसे हो संगम बताए कोई
कहाँ वो कहाँ हम बताए कोई
मसर्रत अगर दिल में रक्खा करें
कहाँ जाएगा ग़म बताए कोई
बताने में जाता भी क्या है मियाँ
तो शोलों को शबनम बताए कोई
ये जज़्बात झूठे हैं माना चलो
पर आँखें हैं क्यूँ नम बताए कोई
कहाँ रोज़ की वो अज़ीयत गई
कहाँ है शब-ए-ग़म बताए कोई
कोई क़द किसी का जो पूछे कभी
ज़ियादा नहीं कम बताए कोई
हमें चोट पहुँचा के क्यूँ वो भला
करे ख़ुद ही मातम बताए कोई
सभी ज़ख़्म देने में माहिर यहाँ
करे कौन मरहम बताए कोई
क़लम मुन्तज़िर अपना शमशीर सा
तो किस से डरें हम बताए कोई
— Vinamra Singh















