Raaz Gurjar

Top 10 of Raaz Gurjar

    जाते नहीं हैं शौक़ से मैख़ाने आदमी
    दर्दों से जूझते हैं ये दीवाने आदमी

    तारीफ़-ए-इश्क़ में जो कहे चार शब्द तो
    अंजाम-ए-इश्क़ हैं लगे समझाने आदमी

    जाने ये कौन रिश्ता है आता नहीं समझ
    मय्यत पे मेरी रोते हैं अनजाने आदमी

    मोबाइल आज कल सभी की जान बन गया
    जाए न फोन के बिना पैख़ाने आदमी

    अफ़सोस है मुझे मेरे अपनों की ओर से
    धमकाने मुझ को आए हैं बेगाने आदमी
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    Raaz Gurjar
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    आँख इक पल न मेरी लगी रात भर
    याद आती रही आप की रात भर

    शाम खाई क़सम उम्र भर की मगर
    क्या निभाई गई दोस्ती रात भर

    दिन गुज़रता है जब मुस्कुराते हुए
    छाई रहती है क्यूँ बे-दिली रात भर

    क्यूँ न आए मुझे नींद दिन में भला
    मैं जो लिखता रहा शा'इरी रात भर

    आप आए नहीं वा'दा कर के सनम
    दिल जलाती रही तिश्नगी रात भर

    मैं ने जब जब तरन्नुम में ग़ज़लें पढ़ीं
    रुसवा होती रही नग़्मगी रात भर
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    मुहब्बत का जब जब इशारा हुआ है
    परेशान तब दिल हमारा हुआ है

    मुनाफ़ा हुआ है भला इस
    में किस को
    मुहब्बत में सबका ख़सारा हुआ है

    जुदा हम हुए इस तरह से कि जैसे
    जुदा चाँद से इक सितारा हुआ है

    लगाए हैं हम जिस दुपट्टे को दिल से
    हमारे सनम का उतारा हुआ है

    उसे हैं मिले ज़िंदगी में सभी सुख
    हमारा यहाँ बस गुज़ारा हुआ है

    मिरा हौसला भी बड़ा ही अजब है
    मुझे इश्क़ देखो दुबारा हुआ है

    सभी लोग मतलब से हैं रखते रिश्ते
    यहाँ कौन किस का सहारा हुआ है

    तुझे दुश्मनों से बचाया ख़ुदा ने
    मुझे तो ख़ुदा ने ही मारा हुआ है

    समझ के परे है ये जंग-ए-मुहब्बत
    यहाँ जीतने वाला हारा हुआ है
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    तू जो है साथ फिर क्या कमी है मुझे
    बिन तेरे रौशनी तीरगी है मुझे

    वो जो कहती है देखूँ न सूरत तेरी
    चुपके चुपके वही देखती है मुझे

    तेरे जाने से जानाँ अकेला नहीं
    अब ये तन्हाई भी चाहती है मुझे

    जिस को महबूबा समझा वो माँ बन गई
    रोकती है मुझे टोकती है मुझे

    तू जो आए तो लिक्खूँ न इक भी ग़ज़ल
    तेरा होना ही तो शा'इरी है मुझे
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    बिछड़ कर तुझ से मैं क्या क्या करूँ हूँ
    अकेला बैठ कर रोया करूँ हूँ

    मुझे तनख़्वाह दे नौकर हूँ तेरा
    तेरी यादों को मैं ढोया करूँ हूँ

    मुझे इस के अलावा काम क्या है
    तेरी तस्वीर को देखा करूँ हूँ

    कभू गर दिल मेरा लगता नहीं है
    तेरे कूचे से हो आया करूँ हूँ

    बिना तेरे मैं क्यूँ मरता नहीं हूँ
    मैं अपने आप को कोसा करूँ हूँ
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    ये न पूछो के कैसे की है जुस्तुजू
    बस तुम्हारे ही जैसे की है जुस्तुजू

    आदमी को नहीं जुस्तूजू प्यार की
    आदमी को तो पैसे की है जुस्तुजू
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    जैसा कह रहे हो वैसा नहीं है
    दर्द तुम ने अभी देखा नहीं है

    बे-वफ़ाई है दुनिया की रिवायत
    बे-वफ़ाई कोई धोखा नहीं है
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    तुझे पाने की चाहत है नहीं अब
    मुझे तुझ से मुहब्बत है नहीं अब

    जहाँ चाहे वहाँ अब तू चला जा
    मुझे तेरी ज़रूरत है नहीं अब

    नशे ने धो दिया है अब मिरा दिल
    मिरा दिल ख़ूँ से लत-पत है नहीं अब

    मुहब्बत खेल बन कर रह गई है
    मुहब्बत में मुहब्बत है नहीं अब

    वफ़ा पर नाज़ क्या करता है 'आतिश'
    वफ़ा की कोई इज़्ज़त है नहीं अब
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    अब बोल ज़रा क्या तू मिरे यार करेगा
    नफ़रत ही करेगा या मुझे प्यार करेगा

    तू बात मिरी मान ले अब दिल मुझे देदे
    कब तक तू जवानी तिरी बेकार करेगा

    जिस रोज़ भी चाहूँगा जला दूँगा ज़माना
    तू ख़ाक ज़माने को ख़बरदार करेगा

    प्याले में ज़रा मेरे मिला ज़हर भी साक़ी
    बस मय ही पिला क्या मुझे बीमार करेगा

    मैं ने ही सिखाया तुझे हथियार चलाना
    मेरी ही तरफ़ अब तू ये तलवार करेगा
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