Sabiha Sumbul

Sabiha Sumbul

@sabiha-sumbul

Sabiha Sumbul shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sabiha Sumbul's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

0

Content

10

Likes

1

Shayari
Audios
  • Ghazal
मिरी ज़िंदगी की किताब का है हर इक वरक़ यूँ सजा हुआ
कहीं आँसुओं से लिखा हुआ कहीं शोख़ियों से भरा हुआ

मिरी आरज़ुओं की तितलियाँ ये मसल के कौन चला गया
मिरी जन्नतें कहाँ गुम हुईं मिरे ख़्वाब-ज़ारों का क्या हुआ

वही रंग-ओ-नूर की बारिशें वही फूल हैं वही ख़ुशबुएँ
मिरे हम-सफ़ीर कहाँ गए मिरे हम-जलीसों का क्या हुआ

कहीं गुम न हो ये रुसूम में कहीं खो न जाए हुजूम में
ये मिरी जबीन-ए-नियाज़ पर जो है एक सज्दा सजा हुआ

तिरी क़ुर्बतें तिरी चाहतीं सभी नफ़रतों में बदल गईं
मैं तो इब्तिदा से थी बेवफ़ा वो तिरी वफ़ाओं का क्या हुआ

मुझे गुदगुदाता है आज भी तिरे ग़ौरो-ओ-फ़िक्र का सिलसिला
वो शरीर आँखें झुकी झुकी वो क़लम लबों में दबा हुआ

कोई रौशनी की रमक़ नहीं न कोई धुएँ का निशान है
ये दिया भी 'सुम्बुल' अजीब है न जला हुआ न बुझा हुआ
Read Full
Sabiha Sumbul
मैं बिखर न जाऊँ वरक़ वरक़ मुझे ताक़-ए-दिल में सजाइए
मिरा हर्फ़ हर्फ़ है बे-बहा मुझे इस तरह न मिटाइए

है कुदूरतों के हिसार में ये मोहब्बतों का हसीं नगर
ये दयार-ए-आब-ए-हयात है इसे सम-कदा न बनाइए

कोई अक्स तक न ठहर सका मिरी चश्म-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल में
अभी अजनबी से हैं ख़ाल-ओ-ख़द मुझे आइना न दिखाइए

पस-ए-ज़ुल्म आप की बख़्शिशें ये इनायतें ये सख़ावतें
कोई माँग बैठे न ख़ूँ-बहा ये लहू के दाग़ छुपाइए

हो दिलों में हुस्न-ए-क़लंदरी हो ज़बाँ पे ना'रा-ए-सरमदी
जो हिला दे तख़्त-ए-सिकंदरी वही कज-कुलाही दिखाइए

है ख़िज़ाँ की ज़द पे अभी तलक रुख़-ए-'सुम्बुल' दिल-ए-यासमीं
अभी इंतिज़ार का वक़्त है अभी जश्न-ए-गुल न मनाइए
Read Full
Sabiha Sumbul