अपने हाथों में जिगर थाम लिया है मैं ने
वो मेरे शहर में आएँगे सुना है मैं ने
अब नहीं प्यार मुझे तुम से मगर सच मानो
जितनी भी बार कहा झूठ कहा है मैं ने
वक़्त-बे-वक़्त बहुत रोई हैं आँखें मेरी
तेरी तस्वीर को जब-जब भी तका है मैं ने
हैं सर-ए-दहर बहुत लोग मेरे पर कान्हा
हर दफ़ा तुम पे भरोसा ही किया है मैं ने
साथ क्यूँ छोड़ गए लोग मेरा ग़ुरबत में
जबकि लोगों का बहुत साथ दिया है मैं ने
— Yashvardhan Mishra 'Hind'















