हर तरफ़ ज़ुल्म की ही ख़बर है
ख़ौफ़ में जी रहा हर बशर है
सख़्त होना पड़ेगा हमें भी
वरना जीने की मुश्किल डगर है
हम भी क़ाइल हैं उन की हया के
उन की रहती जो नीची नज़र है
फ़िक्र उस की करूँगा हमेशा
उन्सियत उस को मुझ से अगर है
इश्क़ कर के ज़रा मुझ से देखो
जाँ लुटा दूँ ये क़ौले ज़फर है
— Zafar Siddqui















