बस उस के लोगों का जैसे ही मुझ पे शक जाए

वो करना जिस से कि उन का भी दिल धड़क जाए

हो पहले तो ये बलंदी-ए-कोह पे इज़हार
ये क्या कि हाथ से फिर हाथ भी सरक जाए

बस इस लिए किसी को छोड़ने नहीं जाता
किसी को छोड़ने कोई कहाँ तलक जाए

सड़क पे ला के इस उल्फ़त ने तोड़ दी हिम्मत
कहाँ कि ख़ुद-ब-ख़ुद अब उस तरफ़ सड़क जाए

वो ऐसे शहर में रहती है दोस्त जिस
में कोई
चले तो चलता रहे बैठे गर तो थक जाए

— Ayush Aavart

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